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Showing posts from April, 2022

क्या सूफियाना समा साज़ के साथ जायज़ है या नही?

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 इस पोस्ट और इस सवाल के जवाब को पढ़ने पढ़ने से पहले हमें जानना होगा कि सूफियाना क़व्वाली किसे कहते है? Sufiyana Qawwali ( sama ) saz के साथ कोई कुफ़्रिया कालीमात नही पढ़ी जाती, अगर ऐसी क़व्वाली हो जिस में कुफ़्रिया कालीमात पढ़ी जाती हो तो वो क़व्वाली जाएज़ नही।  लेकिन हमारे यहां जो सूफियाना क़व्वाली ख़ानक़ाहों में रायज़ है उनमें कोई कुफ़्रिया कलीमात नही पढ़ी जाती है, उनके क़व्वाली सहने नबी, सहने औलिया पर ही होती है जो जाएज़ है। इस अहम सवाल का जवाब में मैं कुछ अहम हदीसे मुबारक पेश करना मुनासिब और पुर असर दलील समझता हूं। हदीस:- हज़रत अब बक़र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हु उनके यहां आए तो नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम वही तशरीफ़ रखते थे ईद उल फितर या ईद उल अज़हा का दिन था दो लड़कियां योमे बआस के बारे में वह अशआर पढ़ रही थी जो अंसार के शोअरा ने अपने फख्र में कहे थे। अब बक़र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हो ने कहा ये शैतानी गाने बाजे ! ( नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के घर में दो मर्तबा उन्हों ने यह जुमला दोहराया, लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने फरमाया अब बक़र उन्हें छोड़ दो । हर क़ौम की ईद होती है और हमारी ईद आज का...

Quran kahta hai insan mitti se bana hai क़ुरआन कहता है इंसान मिट्टी से बनी है।

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 कुछ लोग क्या अक्सर लोगों के मन में ये सवाल अक्सर घूमता होगा अगर आप गौर करते होंगे तो  सवाल? क़ुरान कहता है इंसान मिट्टी से बना है जबकि इंसान में मांस पेशियां मौजूद है ये कुछ समझ नही आता इस सवाल को जवाब बहुत अहम है तमाम लोगों के लिए आम लोग हों या साइन्स के स्टूडेंट्स हो या फ्रोफेसरज हों। तमाम लोगों के लिए बेहद आश्चर्य है। इस सवाल का जवाब पहली बात क़ुरान के हर 1, 1 नुक़्ता में गहराई छुपी हुई है अगर आप क़ुरान को गहराई से पढ़ेंगे तो आप के सर सवाल का जवाब क़ुरान दे देगा। साहब किराम की ऊंट जब खो जाए करती तो क़ुरान से पता लगाया करते थे कि ऊंट गई कहाँ या है कहाँ। इस अहम सवाल का जवाब कुछ साइंटिफिक है। इसके जवाबात के लिए पहले आप को और कई सारे सवाल का जवाबात जानन बहुत ज़रूरी है। मिट्टी में को से तत्व मोजूद है? आम तौर पर हायड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सिजन इत्यादि तत्व मौजूद है। और अगर आप इंसान के जिस्म का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे शरीर मे भी नाइट्रोजन, हायड्रोजन, ऑक्सिजन इत्यादि तत्व मौजूद है। इस आसन जवाब से पता चलता है कि इंसानी जिस्म भी मिट्टी की ही बनी है। इंसान एक छोटी सी करिश्मा है तख़लीक़ कायनात है...

सफर इंसानियत insaniyat ka safar

 इंसान अपने सफर में हमा वक़्त लगा रहता है। चाहे वो जैसा भी हो अच्छा, बुरा , नेक, बाद , बाद एखलाक , खुश एखलाक जैसा भी हो इंसान जब पैदा होता है उसी वक़्त से अपना सफर तय करते रहता है लेकिन बात ये है कि सफरे इंसानियत पे कौन लोग है। कौन लोग इंसानियत की मंज़िल से गुज़र रहे है अगर इस दौर के लोगों को देखा जाय तो इंसान दूर दूर तक नज़र नहीं आते तो इंसानियत का सफर कहाँ से मिलेगा। इंसान नज़र नही आने का मतलब इंसान तो सड़को पे, अपने घरों में, दरवाजों पर, हर जगह हैवान बने बैठे है। इंसान तो अपनी इंसानियत ही भूल गई है। मेरी बात पे यकीन न हो तो आप एक बार अपने रोज़ मररह की ज़िंदगी मे आस पास के लोगों को देख लीजिए कई लोग ऐसे है जिनके घर से 1k g से ज़ियादा रोटी चावल डेली फेंक दिया जाता है वही हमारे पड़ोस में रहने वाले को एक वक़त की रोटी भी नसीब नही तो हम कैसे कहें कि हम इंसानियत की राह पे चल रहे है हम दिखावट के हिसाब से तो इंसान है लेकिन इंसान की शक्ल में हैवान बने बैठे है। इंसान अपनी इंसानियत भुला बैठा है इसीलिए डायरेक्ट बड़ा करने की बात करते है। उनके बात में लॉजिक नही होता।

Soch hi safalta hai

 इंसान की सोच ही कहीं न कहीं उसकी सफलता का पहला जिन ( सीढ़ी ) होता है।  जितनी बड़ी सोच उतना ज़ियादा सफल, जब तक आप कुछ बड़ा नहीं सोचेंगे टैब तक बड़ी सफलता हासिल कैसे कर पाएंगे? आप बड़ी सफलता के लिए बड़ी सोच रखनी होगी और उन बड़ी सोच को बिल्कुल छोटी सी इन्वेस्टमेंट से शुरू करना होगा। वह इस लिए की कभी भी किसी को डायरेक्ट छत पे चढ़ने की कोशिश नही करनी चाहिए इंसान को हमेशा सीढ़ी की तलाश करनी चाहिए ताकि वो हमारे रोज़ का काम हो सके चढ़ना उतरना अगर आप डायरेक्ट छत पे बगैर सीढ़ी के चढ़ जाते है तो शायद आप को उतारने में बहुत तकलीफ हो। आप अपनी सोच को हमेशा बड़ी रखे लेकिन उसकी शुरुआत बिल्कुल छोटी सी स्टार्टअप से कीजिये क्योंकि मालूमात धीरे धीरे होती है। जैसे जैसे आप फील्ड में आगे बढ़ते जाएंगे वैसे वैसे आप की बड़ी सोच रंग लाती जाएगी। और आप को बड़ी पड़िशानियों से घबराना नही चाहिए यही तो हमे हिम्मत वाला बनाती है।

Aap ka work hi aap ke bare men batata hai

 Aap ke kam ki wajah se hi log aap ko pahchante hai. Aur aap ki kam se aap ko apna pahchan milta hai. Waise to log bahut sare hai jinhe un ke aas pass wale bhi n jante aur nahi pahchante hai.  Ab kaam ki wajah se insan do category me bant diya jata hai. 1. Achhe insan 2. Bure insan Achhe log unhe samajhte hai jo apna kam aur wada time se pura karta ho. Apne kam men kahi ki nahi karta ho. Apne kaam ko lagan aur junun se karta ho. Apne kam me jhut ko bich men n lata ho aur haqiqat me dekha jay to aise insan ko bahut sabr ki zaroorat padti hai. Kyuki kam inka kam aram aram se chalta hai tab kahin ja kar janta hai aur phir wo apne man chahe tariqe se rozi roti kamata hai. Wahi dure insan ki baat ki jay to log use kabil samajhte hai. Unka rawaiya kuch sahi n hota. Unka kam adha adhura hota hai. Pura bhi ho jay to usme kahin n kahin jhut shamil hota hai. Aur aise insan kam lagatar chalta hai kyunki wo jhut sach bol kar logon ko lagatar apne taraf mail karne me laga rahta hai. Baat y...

Muzaffarpur की सबसे बड़ी लाइब्रेरी व अकादमी (Al-Quds Library, Al-Quds Academy) की तामिरी काम शुरू हो चुका है

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  ज़िला मुज़फ़्फ़रपुर की सबसे बड़ी इस्लामिक लाइब्रेरी अल-क़ुद्स लाइब्रेरी (Al-Quds Library) और अल-क़ुद्स अकादमी की तामिरी काम शुरू हो चुकी है।  1. Al-Quds Library अल-क़ुद्स लाइब्रेरी जिसमे जहाज़ारों की तादाद में उर्दू, अरबि, फ़ारसी, हिंदी, इंग्लिश इन तमाम भाषा मे किताबें मौजूद है, तालिबे इल्म हुसूले इल्म के लिए बहुत दूर से इस लाइब्रेरी से इस्तिफादह हासिल करने आते है। हर इल्म व फुनून की किताबें ईद लाइब्रेरी में मौजूद है। हदीस, क़ुरआन, सीरत, वाक़्यात, physics, chemistry, biology, इतिहास और बहुत सारी फुनून की किताबें मौजूद है। किताबों की तादाद ज़ियादा होने के कारण लाइब्रेरी की जगह कम पड़ रही है मजबूरन पैसा न होने के कारण भी लाइब्रेरी बनानी पड़ रही है ताकि किताबों को दियार लगने से बचाया जा सके और तालिबे इल्म के लिए इस तरह सजाया से सके कि हुसूले इल्म के लिए किताबें आसानी से मिल सके। इस तामीर की तामिरी काम में लग भग 1.5 लाख की ज़रूरत है जिसमे आधा काम हो चुका है आधा बाकी है। आप लोग अगर चाहें तो मुज़फ़्फ़रपुर की सबसे बड़ी लाइब्रेरी के तामिरी काम मे मदद कर सकते है। और चाहें तो अल-क़ुद्स अकादमी के मेंबर बन ...

अपने समाज को खुशहाल बनाने का एक बेहतरीन मौका

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एक समझ को खुश रखने के लिए बहुत सारी चीजों की ज़रूरत होती है। जो मेरे एतबार से निनमलिखित है। 1. पढ़ाई 2. आमदनी 3. एक लाइब्रेरी 4. अच्छा एजुकेशन सिस्टम 5. और इन सारी चीजों को सही ढंग से चलाने के लिए एक तंज़ीम एक ग्रुप एक ट्रस्ट और ये सब बनाने के लिए बस थोड़ी सी कोशिश। सब लोग अगर चाहें तो ऐसा मुमकिन है बस थोड़ी की रकम, पैसा जितना भी हो सके, ₹50, ₹100, ₹500, ₹1000 उतना ही महीना ट्रस्ट को दें, और देखें कैसे एक समाज को चन्द सालों में सारा सिस्टम मिल जाता है। अगर आप लोग बस थोड़ी सी मेहनत और कोशिश करेंगे और तो आप को अपना भविष्यफल अच्छा दिखेगा, 50, और 100 रुपये महीना इस ज़माने में कुछ भी नही है लेकिन अगर इस ज़माने में यही 50 और 100 से आप के आने वाले वक्त अच्छे हो सकते है तो यही 50 और 100 आप के काम का है। दारापट्टी में स्थिति अल-क़ुद्स-अकादमी ( Al-Quds Academy) ने यह काम शुरू कर दिया है अभी शुरुआत एजुकेशन से की है एजुकेशन के लिए जगह कम होने के कारण पुरानी लाइब्रेरी की जगह नई लाइब्रेरी का काम शुरू है। लेकिन पैसों की कमी की वजह से लाइब्रेरी पे करकट ही रखा जाएगा। बस आप लोग थोड़ी सी भविष्य के लिए इस लाइब्रेरी...

दुनिया मर्द किसे कहती है?

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  ये एक बहुत अहम सवाल है आज की इस भाग दौड़ की ज़िंदगी मे जहां कुछ लोग बड़े बनने की हवस में भाग रहे हैं, तो वही कुछ लोग सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए मेहनत व मुशक्त कर रहे है, कुछ लोग अच्छे खाने के लिए भाग रहे है , तो कुछ लोग भूखे अवर जैसे तैसे रह कर सिर्फ क़र्ज़ उत्तर ने की कोशिश में भाग रहे है। हक़ीक़त तो इस ज़माने के यही है कि लोगों का भागना मजबूरी बन गया है। भागने से मेरी मुराद घर बार छोड़ कर देश छोड़ कर भाग जाना नही है बल्कि अपनी ख्वाहिश, अपनी मुश्किल, और अपनी ज़िंदगी को बेहत और आसान बनाने के लिए भाग रहे है। लेकिन इस भाग दौड़ के ज़माने में एक सवाल आया कि दुनिया मर्द किसे कहती है? इस ज़माने में मर्द किसे कहा जाता है? मर्द कौन कहला सकता है?  ज़माने को देखते हुए सारे लोगों के मन को टटोलते हुए दुनिया के हिसाब से मर्द वही है जिस के पास पैसा है। और ये बात कहीं कहीं हर पुरुष पे लागू होता दिख रहा है। अगर आप के जेब मे पैसे नही है तो लोग आप की मंदनगी पे सवाल उठा देते है। वर हक़ीक़त तो ये है कि हम और आप वहां कुछ बोल भी नही सकते क्योंकि हक़ीक़त में हम मोहताज है। मर्द तब ही मर्द होता है इस दुनिया के लिए ज...