क्या सूफियाना समा साज़ के साथ जायज़ है या नही?
इस पोस्ट और इस सवाल के जवाब को पढ़ने पढ़ने से पहले हमें जानना होगा कि सूफियाना क़व्वाली किसे कहते है? Sufiyana Qawwali ( sama ) saz के साथ कोई कुफ़्रिया कालीमात नही पढ़ी जाती, अगर ऐसी क़व्वाली हो जिस में कुफ़्रिया कालीमात पढ़ी जाती हो तो वो क़व्वाली जाएज़ नही। लेकिन हमारे यहां जो सूफियाना क़व्वाली ख़ानक़ाहों में रायज़ है उनमें कोई कुफ़्रिया कलीमात नही पढ़ी जाती है, उनके क़व्वाली सहने नबी, सहने औलिया पर ही होती है जो जाएज़ है। इस अहम सवाल का जवाब में मैं कुछ अहम हदीसे मुबारक पेश करना मुनासिब और पुर असर दलील समझता हूं। हदीस:- हज़रत अब बक़र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हु उनके यहां आए तो नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम वही तशरीफ़ रखते थे ईद उल फितर या ईद उल अज़हा का दिन था दो लड़कियां योमे बआस के बारे में वह अशआर पढ़ रही थी जो अंसार के शोअरा ने अपने फख्र में कहे थे। अब बक़र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हो ने कहा ये शैतानी गाने बाजे ! ( नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के घर में दो मर्तबा उन्हों ने यह जुमला दोहराया, लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने फरमाया अब बक़र उन्हें छोड़ दो । हर क़ौम की ईद होती है और हमारी ईद आज का...